Shayari

कुछ अनकही नज़्में

1.

लौट आओ कि मेरी साँसे अब तिनका तिनका बिखरती हैं..
कहीं मेरी जान ना ले ले ये पहली शाम दिसंबर की..

2.

मुझे मालूम है मैं उस के बिना ज़ी नहीं सकता…
उस का भी यही हाल है मगर किसी और के लिए…

3.

वो याद आया कुछ यूँ, कि लौट आए सब सिलसिले….
ठन्डी हवा, पीले पत्ते और नवम्बर के ये दिन..

4.

हिचकियों पर हिचकियाँ मैं रातभर भरता रहा,
वो सो रहा था तो फिर मुझे कौन याद करता रहा.. ?

5.

बचपन की नींद अब बहुत याद आती है..
सिर्फ़ मुहब्बत पर ये इलजाम ठीक नहीं..

6.

जाते वक़्त उसने बड़े गुरुर से कहा था ,”तुम जैसे हज़ार मिलेंगे !
मैंने मुस्कराकर कहा, मुझ जैसे की ही तलाश क्यों ?

7.

वो शख्स…शायद…मुझी को सोच रहा होगा…
आंखों में ये गुलाब…वरना कहां से आए…

8.

हलकी हलकी सी सर्द हवा
ज़रा ज़रा सा दर्द ए दिल
अंदाज अच्छा है ए नवम्बर तेरे आने का

9.

लाजवाब कर देतें हैं…तेरे खयाल…दिल को…
मोहोब्बत…तुझसे अच्छा…तेरा तसव्वुर हैं…

10.

ये किसका खयाल…कौनसी खुशबु…सता रहीं हैं दिल को…
ये जो करार दिल में हैं…कहीं…ये मोहोब्बत तो नहीं..

11.

कोशिश ज़रा सी करता तो मिल ही जाता मैं ….
उसने मगर अपनी आँखों में ….. ढूँढा नहीं मुझे

12.

पूछा था हाल उन्हॊने बड़ी मुद्दतों के बाद…
कुछ गिर गया है आँख में…कह कर हम रो पड़े…

13.

मेरे सीने से लिपटे होते हैं आज भी एहसास तेरे,
जैसे लिखावट कोई लिपटी हो किताबी पन्नो से ।।

14.

गर मिल जाती दो दिन कि बादशाहत हमें,
तो मेरे शहर में तेरी तश्वीर का सिक्का चलता..!

15.

तेरे एक इशारे पे, हम इल्जाम अपने नाम ले लेते
बेवजह, झूठे इल्जाम लगाने की जरुरत क्या थी ?

16.

होश मुझे भी आ ही जायेगा मगर..
पहले ! दिल तेरी याद से रिहा तो हो..

17.

जो तुम बोलो बिखर जाऐंगे, जो तुम चाहो संवर जाऐंगे,
मगर ये टूटना-जुड़ना हमें तकलीफ बहुत देता है..

18.

जो पूरा न हो सका.. वो किस्सा हूँ मै…
छूटा हुआ ही सही.. तेरा हिस्सा हूँ मै..!!

19.

उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को..
अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा..

20.

हम से बेवफाई की इन्तहां क्या पूछते हो दोस्तों…….
वो हम से प्यार सीखती रही किसी और के लिए ….!!

21.

अब उसे न सोचू तो जिस्म टूटने सा लगता है……..
एक वक़्त गुजरा है उसके नाम का नशा करते~करते……!

22.

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो..
मुझे एक रात नवाज़ दे मगर उसके बाद सहर न हो…

23.

चल रहे है जमाने में रिश्वतो के सिलसिले..
तुम भी कुछ ले दे कर, मुझसे मोहब्बत कर लो..

24.

आँख उठाकर भी न देखूँ, जिससे मेरा दिल न मिले,
जबरन सबसे हाथ मिलाना, मेरे बस की बात नहीं..

25.

प्यार ने क्या-क्या गज़ब कर दिया, किसी का नाम कविता किसी को ग़ज़ल कर दिया,
जो एक फूल का वज़न भी उठा न सकी,उस मुमताज के सीने पर ताजमहल रख दिया..

26.

घर उसने क्या बनाया मस्जिद के सामने..
चाहत ने उसकी हमें नमाजी बना दिया..

27.

समझौतों की भीड़-भाड़ में सबसे रिश्ता टूट गया,
इतने घुटने टेके हमने आख़िर घुटना टूट गया,
ये मंज़र भी देखे हमने इस दुनिया के मेले में,
टूटा-फूटा नाच रहा है, अच्छा ख़ासा टूट गया….

28.

चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली,
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे,
शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली.

29.

ये कह कह के हम दिल को समझा रहे है..
वो अब चल चुके,वो अब आ रहे है..

30.

फूँक डालूँगा किसी रोज ये दिल की दुनिया..
ये तेरा खत तो नहीं है कि जला भी न सकूँ..

31.

बड़ी अजीब चीज है ये मौत भी,
कभी कभी उस जगह भी मिल जाती है….
जहाँ लोग जिंदगी की दुआ मांगने जाया करते है…

32.

हर इक हसरत हंस कर उनकी पूरी की हमने,
हमारी एक तमन्ना उनके दिल को भारी कर गयी..

33.

यूँ तो काफी मिर्च-मसाले हैं इस जिंदगी में….
तुम्हारे बिना जायका फिर भी फीका ही लगता है….

34.

चूम कर कफ़न में लपेटे मेरे चेहरे को,
उसने तड़प के कहा…
‘नए कपड़े क्या पहन लिए, हमें देखते भी नहीं’ !!

35.

ना ख़ुशी की तालाश है ना गमे निजात की आरज़ू ,
मैं खुद से नाराज़ हूँ तेरी बेरुखी के बाद..

36.

आज़ उदासी ने भी हाथ जोड़ कर कहा मुझसे,
वास्ता तुझे तेरे प्यार का मेरा आशियां छोड़ दे..

37.

मुमकिन हुआ तो मै तुम्हे माफ़ करूँगा..
फिलहाल तेरे आंसुओ का मुन्तजिर हूँ मैं..

38.

किसी के आने या जाने से जिँदगी नही रुकती..
बस जीने का अँदाज बदल जाता है..

39.

आज इस कदर याद आ रहे हो..
जिस कदर तुमने भुला रखा है..

40.

उस शख़्स को बिछड़ने का सलीका भी नहीं..
जाते हुए खुद को मेरे पास छोड़ गया..

41.

तुम्हें ये कौन समझाये तुम्हें ये कौन बतलाये..
बहोत खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते हैं..

42.

ख़्वाब जितने भी थे जल गए सारे..
अब इन आँखों में नमी के सिवा कुछ भी नही..

43.

तुम हमें मिल जाओ ये मुमकिन नहीं…
हम तुम्हे छोड़ दें ये हमें मंजूर नहीं ..

44.

सिर्फ चेहरे की उदासी से भर आये आंसू..
दिल का आलम तो अभी आपने देखा ही कहा है !!!!

45.

तेरी मुहब्बत भी उस खुदा के करम की तरह है,
जो जरूरतमंद है, बस उसी को ना मिली…

46.

वो एक पल जिसे तुम सपना कहते हो,
तुम्हे पाकर मुझे जिंदगी सा लगता है..

47.

बहुत याद करता है वो मुझे..
दिल से ये वहम जाता क्यों नहीं…

48.

अजब ज़ुल्म करती हैं तेरी यादें मुझ पर ..
सो जाऊँ तो जगा देती हैं जग जाऊँ तो रुला देती हैं..

49.

बताओ ना कैसे भुलाऊँ तुम्हें..
तुम तो वाक़िफ़ हो इस हुनर से..

50.

शुक्रिया उनका कि हमें जीना सिखा दिया..
होते थे जिन आँखों में समंदर उनको ही सुखा दिया..

51.

ताज महल को बनाना तो हमें भी आ गया है अब ..
कोई एक मुठ्ठी वफ़ा अगर ला दे ,तो हम काम शुरू करें..

52.

मैं क्यों करूं मुहब्बत किसी से, मैं तो गरीब हूँ,
लोग बिकते हैं और खरीदना मेरे बस में नहीं…

53.

रिस्ते बन जाते है अनजाने मेँ…
पर तकलीफ होती है निभाने मेँ ..,
रूठनेँ बाले तो पल मेँ रूठ जाते है ..
और उमर गुजर जाती है उन्हेँ मनानेँ मेँ..

54.

ये मुहब्बत भी है क्या रोग फ़राज़,
जिसे भूले वो सदा याद आया…

55.

सफर मोहब्बत का दुश्वार कितना है..
मगर देखना है कोई वफादार कितना है..
यही सोच कर कभी उसे नहीं माँगा हमने…
उसे आजमाना है की वो मेरा तलबगार कितना है…

56.

साँसों का टूट जाना तो बहुत छोटी सी बात है दोस्तों..
जब अपने याद करना छोड़ दें मौत तो उसे कहते हैं..

57.

दीप ऐसे बुझे फिर जले ही नहीं ..
ज़ख्म इतने मिले फिर सिले ही नहीं..
व्यर्थ किस्मत पे रोने से क्या फायदा…
सोच लेना की हम तुम मिले ही नहीं …

58.

लौट के आ गये शाम के परिंदे भी ..
मेरा वो ” सुबह का भूला ” अब तक नहीं लौटा..

59.

नजाकत से मेरी आँखों में वो उसका देखना तौबा..
इलाही हम उन्हें देखें या उनका देखना देखें..

60.

तू मेरे राम में खुदा का तसव्वुर कर ले….
तेरे खुदा में अपना राम देखता हूँ मैं….

61.

चैन मिलता था जिसे आके पनाहों में मेरी,
आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी….

62.
गुज़र गया वो वक़्त जब तेरी हसरत थी मुझको..
अब तू खुदा भी बन जाए तो भी तेरा सजदा ना करूँ..

63.

किसी की यादों ने पागल बना रखा है..
कहीं मर ना जाऊं कफ़न सिला रखा है..
जलने से पहले दिल निकाल लेना..
कहीं वो ना जल जाए जो दिल में छुपा रखा है…

64.

मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ..
सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है..

65.

हो सकती है मोहब्बत ज़िंदग़ी मे दोबारा भी..
बस हौसला हो एक दफ़ा फिर बर्बाद होने का..

66.

कोशिशें जब भी करता हूँ “उनको” भुलाने के लिए..
” वो” ख्वाबों में चले आते हैं, मुझको सताने के लिए..

67.

क्या मिला हमें सदियों कि मोहब्बत से..
एक शायरी का हुनर और दुसरा जागने कि सज़ा..

68.

महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी..
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा…

69.

ज़रा सा बात करने का तरीका सीख लो तुम भी..
इधर तुम बात करते हो उधर दिल टूट जाता है..

70.

उसका वादा भी बडा अजीब था जिंदगी भर साथ निभाने का..
मैंने भी ये नहीं पूछा कि मुहब्बत में साथ दोगे या यादों में..

71.

चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम ..
ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए हम..

72.

वो कहते हैं अपने दिल के रास्ते पर चलो..
जब दिल ही टूटकर चौराहे पर बिखर जाए तो फिर किधर जाएं..

73.

फूल से आशि़की का हुनर सीख ले,
तितलियां ख़ुद रुकेंगी, सदाएं न दे..

74.

आशि़की बेदिली से मुश्किल है,
फिर मुहब्बत उसी से मुश्किल है..

75.

हमें कोई ग़म नहीं था, ग़म-ए-आशि़की से पहले,
न थी दुश्मनी किसी से, तेरी दोस्ती से पहले..

76.

आशि़की सब्रतलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूं, ख़ून-ए-जिगर होने तक..

77.

आग़ाज़-ए-आशि़की का मज़ा आप जानिए,
अंजाम -ए-आशि़की का मज़ा हम से पूछिए..

78.

अपने ख़ून-ए-वफ़ा से डरता हूं,
आशि़की बंदगी न हो जाए..

79.

सोचता हूँ उस की याद आखिर..
अब किसे रात भर जगाती होगी..

80.

बहूत नज़दीक आते जा रहे हो,
बिचरने  का इरादा कर लिया है क्या..

81.

आँगन में खिले गुलाब पर जा बैठी,
हल्की सी उड़ी थी उनके कदमों से जो धूल..
गोरी थी कि अपने बालों में सजाने के लिये,
चुपचाप से जाके तोड़ लाई वही फूल..

82.

बहुत देर तक खामोश रही तुम,
बहुत देर तक चुपचाप रहा मैं,

बहुत देर तक गूफ्तगू होती रही…

83.

हमने अब तक नहीं कहा उसको,
उसने अब तक नहीं कहा हमसे,

हम एक दूसरे से प्यार करते हैं…

84.

दिल गया तो कोई आँखे भी ले जाता,
फकत एक ही तस्वीर कहाँ तक देंखू..

85.

उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं, उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं, ये दिल उसका है, अपना होता तो बात और थी…

86.

ये भी एक तमाशा है इश्क ओ मोहब्बत में,
दिल किसी का होता है और बस किसी का चलता है..

87.

रूह तक नीलाम हो जाती है इश्क के बाज़ार में,
इतना आसान नहीं होता किसी को अपना बना लेना..

88.

मयखाने में बेपरवाह बैठे जरुर हैं,
पर कितना है पीना हम इतने होश में हैं..

89.

रात भर आसमां में हम चाँद ढूढते रहे,
चाँद था कि चुपके से मिरे आँगन में उतर आया..

90.

यह शहर जालिमो का है संभल कर चलना,
लोग सीने से लग कर दिल ही निकाल लेते हैं..

91.

ये भी एक तमाशा है इश्क ओ मोहब्बत में,
दिल किसी का होता है और बस किसी का चलता है..

92.

रूह तक नीलाम हो जाती है इश्क के बाज़ार में,
इतना आसान नहीं होता किसी को अपना बना लेना..

93.

मेरी इबाबतो को ऐसे कर कबूल ऐ खुदा,
के सजदे में ,मै झुकू तो हर रिश्तों कि जिन्दगी सवर जाये !

94.

जिंदगी के राज़ को रहने दो,
अगर है कोई ऐतराज़ तो रहने दो,
पर जब दिल करे हमें याद करने को,
तो उसे ये मत कहना के आज रहने दो..

95.

जिनके मिलते ही ज़िन्दगी में ख़ुशी मिल जाती है,
वो लोग जाने क्यों ज़िन्दगी में कम मिला करते हैं।

96.

मुझसा कोई जहाँ में नादान भी न हो ,
कर के जो इश्क कहता है नुकसान भी न हो …!!

97.

जी जान कर भी वो जान ना पाए,
आज तक मुझे पहचान ना पाए,
खुद ही कर ली बेवफ़ाई हुमने,
ताक़ि उन पर कोई इल्ज़ाम ना आए..

98.

आँखे रो पड़ी उनका ना पैगाम आया,
चले गये हमे अकेला छोड़ कर ये कैसा मुकाम आया..
मेरी तन्हाई हसी मुझ पर और बोली,
आख़िर मेरे सिवा कौन काम आया..

99.

कहाँ नहीं तेरी यादों के हाथ,
कहाँ तक कोई दामन बचा के चले..

100.

पूछ कर मेरा पता बदनामिया मत मोल ले..
ख़त किसी फूटपाथ पर रख दे, मुझे मिल जायेगा..

101.

कल, भीड़ में भी …. तुम हमें तन्हा दिखे,
अब बोल भी दो, है क्या वजह तन्हाई की ?

102.

जमाने भर के एव कम थे,
जो तुमने जाते जाते ये घाव दे दिया कि तुम अच्छे नही हो,

103.

जब वो मिले हमसे अरसे बाद तो उन्होने पूछा हाल -चाल कैसा है,
तो मैने कहा तुम्हारी चली चाल से मेरा हाल बदल गया..

104.

इतनी शिद्दत से वो शख्स मेरी रगो मै उतर गया है,
कि उसे भुलाने कि लिये मुझे मरना होगा..

105.

मोहब्बत का अजीब दस्तूर देखा,
जो उसकी जीत हो तो हम हार जाये..

106.

तुम्हे मोहब्बत करना नहीं आता
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ नहीं आता
ज़िन्दगी जिने के दो ही तरीके है
एक तरीका तुम्हे नहीं आता
एक मुझे नहीं आता …

107.

किसी को भुलाने के लिए ना मर जाना तुम..
क्या जाने कौन तुम्हारी राह देख रहा होगा !!

108.

हम तो रो भी नहीं सकते उसकी याद में
उसने एक बार कहा था
मेरी जान निकल जाएगी
तेरे आंसू गिरने से पहले..

109.

आँसू की कीमत जो समझ ली उन्होने..
उन्हे भूलकर भी मुस्कुराते रहे हम ..

110.

फिकर ही हमारी यही थी..
कि कहीं शिकायत ना हो उनको..
कि क़दर उनकी हमने नही की..

111.

उन्होने हाँ जो कह भी दिया..
क्या पता दुनिया से लड़ना पड़े हमे..!!

112.

ए जिन्दगी खत्म कर अब ये यादो के सिलसिले,
मै थक सा गया हू दिल को तसल्लिया देते देते,

113.

लोग इश्क़ करते है बड़े शोर के साथ,
हमने भी किया था बड़े ज़ोर के साथ,
मगर अब करेंगे ज़रा गौर के साथ,
क्योकि कल देखा था उसे किसी और के साथ!

114.

मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो ‘फ़राज़’
वो मेरे सामने रो रहा है किसी और के लिए..

115.

ज़ख़्म जब मेरे सिने के भर जाएँगे,
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे,
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया,
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे

116.

आज कोई नया जख्म नहीं दिया उसने मुझे ,
कोई पता करो वो ठीक तो है ना..

117.

चले जायेंगे तुझे तेरे हाल पर छोड़कर
कदर क्या होती है तुझे वक़्त सिख देगा .
लोग इश्क़ करते है बड़े शोर के साथ,
हमने भी किया था बड़े ज़ोर के साथ,
मगर अब करेंगे ज़रा गौर के साथ,
क्योकि कल देखा था उसे किसी और के साथ..

118.

मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो ‘फ़राज़’
वो मेरे सामने रो रहा है किसी और के लिए..

119.

ज़ख़्म जब मेरे सिने के भर जाएँगे,
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे,
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया,
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे

120.

आज कोई नया जख्म नहीं दिया उसने मुझे ,
कोई पता करो वो ठीक तो है ना…

121.

चले जायेंगे तुझे तेरे हाल पर छोड़कर..
कदर क्या होती है तुझे वक़्त सिख देगा..

122.

हसरतें आज भी खत लिखती हैं मुझे,
मगर अब मैं पुराने पते पर नहीं रहता!

123.

किसी की चाहत मे इतने पागल ना हो,
हो सकता हे वो तुम्हारी मंज़िल ना हो,
उसकी मुस्कुराहट को मोहब्बत ना समझो,
कहीं ये मुस्कुराना उसकी आदत ना हो…!!!

124.

दिल धड़कता है तो डर सा लगा रहता है,
कोई सुन ना ले, मेरी धड़कन मे नाम तेरा..

125.

तुमसे किसने कह दिया कि मुहब्बत की बाजी हार गए हम?
अभी तो दाँव मे चलने के लिए मेरी जान बाकी है !

126.

इश्क़ का दस्तूर ही कुछ ऐसा है
जो इसे जान लेता है
ये साला उसी की जान लेता है !!

127.

वफ़ा करने से मुकर गया है दिल;
अब प्यार करने से डर गया है दिल;
अब किसी सहारे की बात मत करना;
झूठे दिलासों से भर गया है अब यह दिल।

128.

किस हद तक जाना है ये कौन जानता है,
किस मंजिल को पाना है ये कौन जानता है,
दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो,
किस रोज़ बिछड जाना है ये कौन जानता है.

129.

खुली आंखो से देखा एक ऐसा ख्वाब जो अपना नही था,
आज तक वो शक्स दिल मे है जो उस्स वक़्त भी मेरा नही था !

130.

कुछ नही बदला उसके जाने के बाद इस जिंदगी में,ऐ दोस्तों,
बस कल जिस जगह दिल हुआ करता था आज वहा दर्द होता है..!!

131.

महगाई का आलम तो देखो
घर क्या ले जाना है
जानबूझ कर भूल जाता हूँ

132.

हम से खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,
जिसने जीता उसने भी फेका जिसने हारा उसने भी फेंका…

133.

उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा;,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है..

134.

बहुत दिनों से ख्वाहिश हैं कि किसी दिन वो आए और कहे,
बंद करो ये रोना, लो लौट आई मैं तुम्हारे लिए..

135.

आज़ाद कर दिया हे हमने भी उस पंछी को,
जो हमारी दिल की कैद में रहने को तोहीन समजता था…!!

136.

प्यार की बाते तू क्या जानेगी ……
तू गैर है कोई मेरी अपनी तो नहीं..

137.

तुझ से ज्यादा चाहत मुझे किसी और से मिली है मुझे..
तू मौत की तरफ़ लें जाने वाली राह है वो ज़िन्दगी देने चली है मुझे..

138.

मैं लौट कर आऊं भी तो कैसे हर दरवाजा बंद नज़र आता है..
सुना है हमने भी इश्क करने वालो सेदिल का दरवाजा अंदर से खोला जाता है..

139.

झूठ है के प्यार के रिश्ते जनम-जनमतक जुड़े होते हैं…!!
मैंने तो एक जनम के साथ के लिए, दिल को तड़पते देखा है…!!

140.

मुझे दर्द दे कर तुझे सुकून मिलता है तो दर्द कबूल है मुझे..
तू मेरे बिना खुश है तो तुझ से जुदाई मंजूर है मुझे..

141.

मुझसे जब भी मिलो तो नज़रें उठा के मिला करो,
मुझे पसंद है अपने आप को तेरी आँखों में
देखना..

142.

ये है ज़िन्दगी, किसी के घर आज नई कार आई,
और किसी के घर मां की दवाई उधार आई..

143.

तुम बिन सांसे तो आती है,
मगर जिंदगी महसूस नहीं होती..

144.

तेरी बेरुखी से इस कदर टूट गया हूँ मैं..
लगता है बिन रूह की ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूँ..

145.

जब उसका दर्द मेरे साथ वफ़ा करता है,
एक समुन्दर मेरी आँखों से बहा करता है..

146.

मै नहीं जानता की उसके लिये दिल में एहसास क्यों है..
वो अमानत है गैर की फ़िर भी उसको पाने की प्यास क्यों है..

147.

तू मेरे जनाजे को कन्धा ना देना,
जिन्दा ना हो जाऊ फिर कही तेरा सहारा देख कर !!

148.

चंद खुशियाँ ही बची थी, मेरे हाथो की लकीरो में..
वो भी तेरे आंसु पोछते हुए, मिट गई………….

149.

‘ख़ुदा जाने मेरा क्या वज़्न है उनकी निगाहों में?
सुना है आदमी को वोह नज़र में तोल लेते हैं.!!

150.

बडा जालिम है साहब दिलबर मेरा,
उसे याद रहता है मुझे याद न करना l

151.

मुद्दत हो गयी, कोइ शख्स तो अब ऐसा मिले…
बाहर से जो दिखता हो अन्दर भी वैसा ही मिले..!!

152.

किसी पर भी एतबार ज़रा सोच समझकर, करनामुमकिन नही तुम्हे हर जगह हम मिले..

153.

मैं उदास हूं बिना तेरे कैसे कहूँ की जी नहीं सकता,
कैसे तूने उस गैर को अपना बना लिया,
मैं ये बात अब सह नहीं सकता..

154.

अगर इश्क़ करो तो….अदब-ए-वफ़ा भी सीख लो,
ये चंद लम्हों की बेक़रारी…मोहब्बत नहीं होती…!!

155.

दिल के लिये ज़िंदगी का पैगाम बन गई ….
सिमट के ” तन्हाइयाँ ” तेरा नाम बन गई …..!!

156.

प्यार का तो पता नही..लेकिन जब भी तू परेशान
होती है,
एक अजीब सी बेचैनी हो जाती है मुझे ����

157.

हमदर्द थे…हम-कदम थे…हमसफ़र थे…हमनशीं
जो भी थे बस हम थे ….!
वो तो कभी थे ही नहीं …..!

158.

क्या ऐसा नही हो सकता
हम तुमसे तुमको मांगे….

साहब

और तू मुस्कुरा के कहे
अपनी चीजे माँगा नही करते….

159.

जब तक साँस है , टकराव मिलता रहेगा !
जब तक रिश्ते हैं , घाव मिलता रहेगा !
पीठ पीछे जो बोलते हैं , उन्हें पीछे ही रहने दे ,
रास्ता सही है तो गैरों से भी लगाव मिलता रहेगा।।

160.

मेरी तहरीर से लिपटे हुए ताबूत ना खोल,
अल्फ़ाज़ गर जी उठे तो ख़ौफ़ से मर जाओगे तुम..

161.

किसी को किसी से कम ना आँकिये साहब,
देखिये दोनों ने मिल कर साल बदल दिया..

162.

पहले हम अच्छे थे अब कैसे बुरे हो गये,
तुम ख़ुद तो बदले हो,बयाँन तो ना बदलो..

163.

एक हुनर है चुप रहने का,
इक ऐब है कह देने का..

164.

ये साल भी गुज़रा तेरे प्यार की मानिद,
आते हुए कुछ और था और जाते हुए कुछ और..

165.

सुना है बहुत पढ़ें लिखें हो तुम,
कभी वो भी तो पढ़ो जो हम लिख नहीं पाते..

166.

दिये हैं ज़िन्दगी ने ज़ख़्म एैसे,
के जिनका वक़्त भी मरहम नही..

167.

चालाकी कहाँ मिलती है ज़रा हमें भी बता दीजिये,
ज़रा सा मीठा बोल के हर कोइ ठग लेता है..

168.

यह कैसा ख़्वाब था,झटका सा लगा दिल को,
के इक शख़्स परेशान था मेरी तलाश में..

169.

प्यास कहती है कि अब कोइ रेत निचोड़ी जाय,
अपने हिस्से में समन्दर नहीं आने वाला..

170.

चेहरे बदल बदल कर मिल रहे हैं लोग,
इतना बुरा सलूक मेरी सादगी के साथ !!!

171.

मुझे लहज़ा बदलने से हमेशा ख़ौफ़ आता है,
के लहज़े जब बदलते हैं तो कोइ अपना नहीं रहता..

172.

अजीब लोगों का बसेरा है तेरे शहर में,
ग़रूर में मिट जाते हैं मगर याद नहीं करते..

173.

तकदीर बनाने वाले, तूने भी हद कर दी;
तकदीर में किसी और का नाम लिखा था;
और दिल में चाहत किसी और की भर दी!

174.

न जाने क्यों हमें आँसू बहाना नहीं आता!
न जाने क्यों हाल-ऐ-दिल बताना नहीं आता!
क्यों सब दोस्त बिछड़ गए हमसे!
शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता!

175.

ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो कुछ आदतें बुरी सीख लो…
अग़र ऐब न हों तो लोग महफ़िलों में नहीं बुलाते…

176.

दोस्त समझते हो तो दोस्ती निभाते रहना;
हमें भी याद करना खुद भी याद आते रहना;
हमारी तो हर ख़ुशी दोस्तों से ही है;
हम खुश रहें या ना आप सदा यूँ ही मुस्कुराते रहना।

177.

आसमान से उतरी हैं, तारों से सजाई है..
चाँद की चांदनी से नेहलायी हैं, ए दोस्त,
संभल के रखना ये दोस्ती,
यही तो हमारी ज़िन्दगी भर की कमाई है..

178.

मोहब्बत नहीं है कोई किताबों की बाते!
समझोगे जब रो कर कुछ काटोगे रातें!
जो चोरी हो गया तो पता चला दिल था हमारा!
करते थे हम भी कभी किताबों की बाते!

179.

कभी इतना मत मुस्कुराना की नजर लग जाए जमाने की,
हर आँख मेरी तरह मोहब्बत की नही होती….!!!

180.

कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने,
कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने !!

181.

मोहब्बत यूँ ही किसी से हुआ नहीं करती….,
अपना वजूद भूलाना पडता है,किसी को अपना बनाने के लिए…।

182.

हमने लिया सिर्फ होंठों से जो तेरा नाम..
दिल होंठो से उलझ पड़ा कि ये सिर्फ मेरा है !!

183.

मेरी ख्वाहिश है की मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं,..
माँ से इस तरह लिपट जाऊं की बच्चा हो जाऊं..

184.

प्रेम तब तक सिर्फ एक शब्द भर है जब तक आप इसका अहसास नहीं कर लेते।

185.

तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है, आखरी साँस तक तेरा इंतजार करूँ !

186.

हज़ारो मैं मुझे सिर्फ़ एक वो शख्स चाहिये,
जो मेरी ग़ैर मौजूदगी मैं, मेरी बुराई ना सुन सके !!

187.

तेरा ज़िक्र..तेरी फिक्र ..तेरा एहसास…तेरा ख्याल..!!! तू खुदा नहीं ….फिर हर जगह मौज़ूद क्यूँ है…!!

188.

सीख कर गया है वो मोहब्बत मुझसे,
जिस से भी करेगा, बेमिसाल करेगा।

189.

हाथों की लकीरों के फरेब में मत आना..
ज्योतिषों की दूकान पर ”मुक्कदर” नहीं बिकते..

190.

‘साहिल’ पे बैठे यूँ सोचता हूँ मैं आज
कौन ज्यादा मजबूर है
ये किनारा जो चल नहीं सकता या
या वो लहर जो ठहर नहीं सकती ?